छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतीक व परंपरागत संस्कृति समान्य ज्ञान जनरल नॉलेज

राज्य प्रतीक व परंपरागत संस्कृति समान्य ज्ञान (Chhattisgarh State Symbols and Traditional Culture GK)-

jharkhand राज्य की राज्य प्रतीक व परंपरागत संस्कृति जॉबआईसर्च इनछत्तीसाढ़ राज्य में पाई जाने वाला बारीक मुरम या रेतीली मिट्टी भाटा कहलाती है, इस राज्य में लाल और पिली मिटटी सर्वाधिक पाई जाती है, इस राज्य में महिलाएं गोदना (शरीर में कुछ गुदवाना) एक  परम्परा के रूप में धारण करती है, रजत में बेल धातु या ढोकरा काम सबसे लोकप्रिय कला है, बांस काम(डिज़ाइन), वॉल चित्रकारी भी यहां देखी जा सकती है।

छत्तीसगढ़ कोसा रेशम और मोम कला के लिए प्रसिद्ध है, इसको बहुत ही सुंदर रंग से सजाया जाता है जो पर्यटकों को बहुत लुभाते है, घटारानी झरना घने जंगलों से घिरा तथा जतमई मंदिर के कारण लोगो का आकर्षक केंद्र है जो रायपुर पर स्थित है, सरहुल नृत्य मुरिया जनजाति का लोक्रिय नृत्य है, छत्तीसगढ़ जैविक ईंधन (बायोडीजल) का व्यावसायिक प्रयोग में लेन वाला तीसरा राज्य है, कोरबा जनजाति द्वारा कर्मा त्यौहार मनाया जाता है, मड़ई नृत्य रावत जनजाति के लोग करते है, दादरिया गीत को छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का राजा कहा जाता है, राजिम को “छत्तीसगढ़ का प्रयाग” कहा जाता है।

राज्य पक्षी – पहाड़ी मैना

राज्य फूल – कोई नहीं

राज्य पेड़ – साल

राज्य पशु – वन भैंसा

आभूषण – तोड़ा (चाँदी), पैरी (काँसे),पैजन (चाँदी), लच्छा (चाँदी), साँटी (चाँदी), बिछिया, बिछुआ, चुटकी, हाथ में – ऐंठी (चाँदी) गोल, सिम्पल कंगन या कड़ा टरकउव्वा (चाँदी) कंगन या कड़ा चोटी की तरह गुंथा हुआ, पटा (चाँदी की प्लेन प्लेट ), तरकी (सोने का), कान में छुमका, ढार,खिनवा, करन फूल, नाक में- फुल्ली, नथ, गले में-रुपियामाला (चाँदी), तिलरी, सूता, पुतरी, सुँड़रा, कमर में- करधन (चाँदी का), नांगमोरी(कोहनी से ऊपर), पुरुष- चुरवा, कान की बारी, गले की कंठी

वाद्य यंत्र – धनकूल, चिकारा, सारंगी, किन्दरी, तम्बूरा, निसान, दफड़ा, नगाड़ा, खन्जेरी, माँदर, खड्ताल, मन्जिरा, अलगोजवा, तूतरू, मोहरी, बाँस, सिंगबाजा, टुनटुनी

परंपरागत पोशाक – माहेश्वरी रेशम, उड़ीसा सिल्क, चंदेरी सिल्क और बाटिक प्रिंट साड़ी

व्यंजन – चीला, फरा, ठेठरी, खुरमी, चैसीला, खीर, लड्डू, अईरसा, देहरौरी, पपची, गुजिया, लपसी, गुलगुला, पकवा, पिड़िया, सोहारी, भजिया, बैचांदी, सिंघारा, तीखूर

लोक नृत्य – सैला नृत्य, सुवा नृत्य, कर्मा नृत्य, रावत (राउत) नृत्य

लोक गीत – दादरिया गीत

समारोह – चक्रधर समारोह, बस्तर लोकोत्सव, काजरी महोत्सव, मादै महोत्सव, भोरमदेव महोत्सव, हरेली महोत्सव, नवखना महोत्सव

मेला – शेओरीनरयन  मेला, नारायणपुर मेला, चंपारण मेला, राजिम लोचन महोत्सव

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